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छोटे कृषि भूमि को बेचना किसानों के लिए बन गये हैं मुसीबत, सरकार के नये कानून से किसानों में आक्रोश 

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 सरकार के नितियों से किसान आक्रोशित-
     भिलाई। राजस्व विभाग व्दारा जारी गाईड लाईन देखकर छोटे कृषि भूमि के कृषकों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। अब किसान आवश्यकता पड़ने पर अपनी भूमि का छोटा टुकड़ा बेच पाने असमर्थ हैं। छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से जमीनों के दाम लगातार बढ़ते रहे हैं। अवैध प्लाटिंग और अवैध विक्रय को रोकने अनेक नियम सरकार ने बनाये। लेकिन भाजपा के पुनः सत्ता में आने के बाद छोटे कृषि भूमि को किसानों व्दारा बेच पाना एवं खरीदना असम्भव सा हो गया है।
     चाहे शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि भूमि के छोटे टुकड़े या एक हिस्से को बेचकर अपनी जरूरतों को जैसै बच्चों का विवाह,घर बनाना, कोई बिमारी हो तो उसके ईलाज आदि जरूरतों को पूरा करते थे, लेकिन सरकार ने शहरी क्षेत्र में 50 डिसमिल से कम एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 37.5 डिसमिल से कम भूमि के विक्रय को फुट में बेचने के दर में लाये जाने से किसान जमीन बेचने या खरीदने में असमर्थ हो गये हैं। नये नियमों के लागू किये जाने का बुरा असर छोटे भूमि स्वामियों पर पड़ने लगा है। वे जमीन बेचने या खरीदने पर लगने वाले पंजीयन शुल्क देने में असमर्थ हो गये हैं,जिसके कारण किसान ना तो जमीन खरीद पा रहे हैं और ना ही बेच पा रहे हैं। यदि प्रदेश सरकार इस नये बनाये गये नियमों में जल्द बदलाव नहीं किये तो भूमि धारकों में सरकार के खिलाफ आक्रोश उत्पन्न होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वहीं भूमि पंजीयन से होने वाले राजस्व में कमी आने की भी संभावना है।

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