ARMY AIR DEFENCE: भारतीय थलसेना में मिडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल “अभ्रा” की दो रेजिमेंट स्थापित हो चुकी है. पहली रेजिमेंट स्थापित हुई थी इस्टर्न कमांड में. मतलब साफ है चीन के किसी भी एरियल अटैक का मकूल जवाब देने के लिए. यह भारतीय थलसेना के एयर डिफ़ेंस कोर की पहली मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल रेजिमेंट थी. दूसरी रेजिमेंट सेना के दक्षिण कमांड में स्थापित की गई है. लगातर इस मिसाइल की मारक क्षमता को समय समय पर परखा जाता है. उसी कड़ी में 3-4 अप्रैल को उड़ीसा के अब्दुल कलाम द्विप से चार सफल फ्लाइट टेस्ट को अंजाम दिया. यह ट्रायल थल सेना और डीआरडीओ ने मिलकर किया. यह ऑपरेशनल फ्लाइट ट्रायल था जिसे हाई स्पीड एरियर टार्गेट के खिलाफ अंजाम दिया गया. सभी चारों ट्रायल में मिसाइल ने एरियल टार्गेट को इंटरसेप्ट किया और डायरेक्ट हिट किया.
चारो टार्गेट थे एक दूसरे से अलग
इस एयर डिफेंस सिस्टम की सबसे खास बाद यह है खतरा चाहे ट्रेडिशनल हो या फिर एडवांसड, यह सिस्टम बहुत जल्दी से रिएक्ट कर दुश्मन के खतरे को नष्ट कर सकता है. इस सिस्टम से एक ही वक्त में दुश्मन के अलग अलग 16 टारगेट पर 24 मिसाइल दाग सकता है. ऑपरेशनल ट्रायल में चार अलग अलग टार्गेट को चुना गया था. इस मिसाइल को लॉंग रेंज, शॉर्ट रेंज, हाई एलटिट्यूड और लो एलटिट्यूड के खिलाफ फायर किया गया. मिसाइल के प्रदर्शन को चांदीपुर इंटीग्रेटेड फायरिंग रेंज पर स्थित रडार और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम से कैप्चर किए गए फ्लाइट डेटा से पुष्टी की गई. इस फायरिंग को डीआरडीओ की गाइडेंस में सेना के इस्टर्न और वेस्टर्न कमांड ने अंजाम दिया.
गेमचेंजर से ‘अभ्रा’
MRSAM यानी मिडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल को डीआरडीओ और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्री ने मिलकर डिवेलप किया है. यह एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के एयरक्राफ्ट, ड्रोन, गाइडेड हथियार यहां तक की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को भी आसानी से ट्रैक कर के उसे नष्ट कर सकता है. यह सिस्टम डेडिकेटेड रडार के सपोर्ट से अकेले फायरिंग यूनिट की तरह ऑपरेट कर सकता है. ये एक सुपरसोनिक मिसाइल हैं. यह सिस्टम एक ऐसे सीकर से लैस है जो कि यानी दुश्मन के एरियल खतरे को ढूंढकर उसे नष्ट कर देता है. इसकी रेंज 70 किलोमीटर से ज्यादा है. यह दुश्मन के एयरक्राफ्ट को 110 किलोमीटर तक भी निशाना बना सकती है. यह एक मोबाइल वर्टिकल लॉन्चर है. इसे कम समय में किसी भी जगह पर तैनात किया जा सकता है. इस सिस्टम की एक बैटरी में तीन लॉन्चर है. हर लॉंचर में 8 ट्यूब है. एक बार सभी मिसाइल लॉन्च होने के बाद महज कुछ समय में ही इसे फिर से रीलोड भी किया जा सकता है. सितंबर 2021 में भारतीय वायुसेना के लिए इसी MRSAM की पहली रेजिमेंट को जैसलमेर में स्थापित किया गया था.