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पीएम मोदी थाईलैंड और श्रीलंका की यात्रा पर, कई अहम समझौते की उम्मीद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को थाईलैंड और श्रीलंका की तीन दिनों की यात्रा पर रवाना हो गए. इस दौरान वे कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिनका मकसद भारत का इन देशों और बिम्सटेक (BIMSTEC) देशों के साथ सहयोग बढ़ाना है. उनकी यह यात्रा आज थाईलैंड से शुरू होगी और फिर वे श्रीलंका जाएंगे. पीएम मोदी गुरुवार को थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनवात्रा से मुलाकात करेंगे. इस मुलाकात में भारत और थाईलैंड की दोस्ती के हर पहलू पर बात होगी. दोनों देशों के बीच व्यापार, संस्कृति और आपसी रिश्तों को मजबूत करने पर जोर रहेगा. अगले दिन शुक्रवार को मोदी बिम्सटेक सम्मेलन में शामिल होंगे. इस दौरान वे थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न से भी मिलेंगे. यह यात्रा शिनवात्रा के निमंत्रण पर हो रही है.

पीएम मोदी ने अपने बयान में कहा कि पिछले 10 सालों में बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में विकास, संपर्क और आर्थिक तरक्की के लिए एक बड़ा मंच बन गया है. भारत का पूर्वोत्तर इलाका इस क्षेत्र के बीच में है, इसलिए यह भारत के लिए बहुत खास है. वे बिम्सटेक देशों के नेताओं से मिलकर लोगों के हित में सहयोग बढ़ाने की कोशिश करेंगे. थाईलैंड में वे शिनवात्रा और वहां के नेताओं से भी बात करेंगे. दोनों देशों के बीच पुराने रिश्ते हैं, जो संस्कृति, दर्शन और आध्यात्मिकता पर आधारित हैं. इन रिश्तों को और मजबूत करना उनका लक्ष्य है.

4 अप्रैल को श्रीलंका जाएंगे
थाईलैंड के बाद पीएम मोदी चार अप्रैल को श्रीलंका जाएंगे. यह यात्रा दो दिन की होगी और 6 अप्रैल को खत्म होगी. पिछले साल दिसंबर में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके भारत आए थे. अब मोदी और उनके बीच हुई बातों को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा. दोनों नेता साझा भविष्य के लिए साझेदारी पर काम की समीक्षा करेंगे और भविष्य के लिए योजना बनाएंगे.

अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि ये यात्राएं भारत के पुराने रिश्तों पर आधारित हैं. वे चाहते हैं कि थाईलैंड और श्रीलंका के साथ दोस्ती और गहरी हो, ताकि दोनों देशों के लोग और पूरा क्षेत्र फायदा उठा सके. उनकी यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति का हिस्सा है, जिसके तहत भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है.

यह यात्रा भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय सहयोग बढ़ेगा और भारत की भूमिका मजबूत होगी. मोदी का मानना है कि इन मुलाकातों से न सिर्फ पुरानी दोस्ती को सम्मान मिलेगा, बल्कि भविष्य के लिए भी नई राह बनेगी. लोगों को उम्मीद है कि यह यात्रा भारत, थाईलैंड, श्रीलंका और बिम्सटेक देशों के बीच रिश्तों को नई ऊंचाई देगी.

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