एक अप्रत्याशित घटनाक्रम के तहत चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू से बात की है. जनसंख्या और मार्केट के लिहाज से दुनिया के दो बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के 75 साल पूरा होने पर एक दूसरे को बधाई दी है. इसके साथ ही संबंध को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा की. राष्ट्रपति मुर्मू और प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका की ट्रंप सरकार टैरिफ वॉर छेड़े हुए है. डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ (जिस देश की तरफ से जितना इंपोर्ट टैक्स लगाया जा रहा है, उसके खिलाफ उतना ही टैरिफ लगाना) के लिए 2 अप्रैल की तिथि घोषित कर रखी है. मतलब यह है कि यदि ट्रंप अपने रुख पर कायम रहते हैं तो 2 अप्रैल यानी बुधवार से दुनिया की आर्थिक और द्विपक्षीय संबंधों की तस्वीर बदल सकती है. ट्रंप सरकार के रुख से अमेरिका को इकोनोमी और स्ट्रैटजी के लेवल पर गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
ऐसा काफी कम बार देखा गया है कि चीन के राष्ट्रपति ने आगे बढ़कर भारत के राष्ट्रपति से बात की है, लेकिन 1 अप्रैल 2025 को ऐसा हुआ है. चीन के प्रेसिडेंट ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बात की है. इस दौरान शी जिनपिंग ने भारत के साथ संबंधों को और दुरुस्त करने पर जोर दिया. बदले माहौल में शी जिनपिंग ने कहा कि ड्रैगन और हाथी एकसाथ मिलकर कमाल कर सकते हैं. बता दें कि ड्रैगन चीन तो हाथी भारत का प्रतीक है. ट्रंप की ओर से छेड़े गए टैरिफ वॉर के बीच शी जिनपिंग और द्रौपदी मुर्मू के बीच इस बातचीत का अपना अलग की महत्व है. बता दें कि भारत और चीन अपने संबंधों को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है. लद्दाख रीजन में तकरीबन 5 साल से चले आ रहे सीमा विवाद को भी बातचीत के जरिये सुलझा लिया गया है. अब दोनों देश अन्य क्षेत्रों में भी विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में काम कर रहा है.
चीन ने दिया बड़ा संकेत
ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच चीन ने भारत के साथ आर्थिक संबंध को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है. दरअसल, दोनों देशों के बीच ट्रेड गैप (इंपोर्ट और एक्सपोर्ट) काफी ज्यादा है. फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में भारत ने चीन को 16.65 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि 101.75 बिलियन डॉलर का इंपोर्ट किया. इस तरह दोनों देशों के बीच ट्रेड डेफिसिट 85 बिलियन डॉलर से ज्यादा तक पहुंच गया है. ट्रंप की नीति के चलते अब हर देश अपना-अपना पोजिशन बदल रहा है और आर्थिक संबंधों को दुरुस्त करने में जुटा है. इसी क्रम में चीन ने भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करने का प्रस्ताव रखा है. चीन ने ज्यादा से ज्यादा भारतीय सामान इंपोर्ट करने की इच्छा जताई है. चीन के राजदूत शु फियांग ने ट्रंप सरकार के टैरिफ ऐलान के प्रभावी होने से ठीक पहले कहा कि बीजिंग ट्रेड गैप को कम करने के लिए ज्यादा भारतीय माल आयात करना चाहता है.
…तो तबाह हो जाएगी अमेरिका की इकोनॉमी
डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते अमेरिका अलग-थलग पड़ता जा रहा है. अमेरिका के पुराने दोस्त भी अब वॉशिंगटन के दुश्मनों से हाथ मिलाने लगे है. कनाडा और यूरोप के बाद टैरिफ वॉर असर अब एशिया में भी दिखने लगा है. चीन के कट्टर दुश्मन और अमेरिका के पुराने यार जापान और दक्षिण कोरिया ने बीजिंग से हाथ मिलाने का ऐलान किया है. ऐसे में यदि डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ को अमल में लाने पर आगे बढ़ते हैं, तो यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए काफी विनाशकारी हो सकता है. इसके साथ ही सामरिक तौर पर भी अमेरिका के लिए यह कदम आत्मघाती साबित हो सकता है. अमेरिका के कई इकोनॉमिस्ट इसको लेकर ट्रंप सरकार को आगाह कर चुके हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप अभी तक अपने रुख पर कायम हैं.